आयुर्वेद का प्रयोजन ऋग्ण व्यक्ति की चिकित्सा करके स्वस्थ बनाना और स्वस्थ व्यक्ति का स्वास्थ्य बरा…
Published
आयुर्वेद का प्रयोजन ऋग्ण व्यक्ति की चिकित्सा करके स्वस्थ बनाना और स्वस्थ व्यक्ति का स्वास्थ्य बराबर रखना। वर्षा ऋतुमें संचित पित्त का शरद ऋतुमें प्रकोप होता है। उसके कारण किसी-किसी व्यक्तिमें पित्त संबंधी रोगों की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ऐसे व्यक्तिओंकी चिकित्सा करने के लिए रक्तमोक्षण और विरेचन जैसी पंचकर्म चिकित्सा द्वारा शरीर का शोधन अर्थात् शुद्धि करवाने से व्यक्ति को रोग से मुक्ति मिलती है। स्वस्थ व्यक्ति को ऐसी पित्त संबंधित बीमारी न हो ईस लिए (as a preventive measure) यह पंचकर्म चिकित्सा करवानी चाहिए।